संसृति
“बनें संसृति के मूल रहस्य, तुम्हीं से फैलेगी यह बेल।”कामायनी की ये पंक्ति संसृति के लिए एक सहज आह्वान है।
‘संसृति’ साहित्य को अपने समय, समाज और मनुष्य को समझने की एक जीवंत प्रक्रिया मानती है। यह विचार, संवाद और सृजन के माध्यम से साहित्य की विविध आवाज़ों को एक साझा परिसर में लाने का प्रयास है—जहाँ परंपरा और समकालीनता के बीच संवाद हो, नए प्रश्नों के लिए जगह हो और रचनात्मकता को अपनी राह चुनने की स्वतंत्रता।
विचार से संवाद, संवाद से सृजन—यही‘संसृति’की यात्रा है।